हफ़्ते में एक शतरंज क्लास बढ़िया शुरुआत है, पर जो बच्चे क्लास के बीच थोड़ी प्रैक्टिस करते हैं, वे बहुत तेज़ी से सुधरते हैं। अच्छी ख़बर यह है कि घर की प्रैक्टिस लंबी होने की ज़रूरत नहीं, और मदद करने के लिए आपको शतरंज खेलना आने की भी ज़रूरत नहीं।
यहाँ एक आसान रूटीन है जिसमें रोज़ लगभग 20 मिनट लगते हैं, और साथ में प्रैक्टिस के वे तीन तरीके जिनसे सबसे बड़ा फ़र्क पड़ता है।
प्रैक्टिस के तीन तरीके
- पज़ल से नज़र टैक्टिक्स और चेकमेट पकड़ना सीखती है। ये छोटी होती हैं, इसलिए किसी भी दिन में फ़िट हो जाती हैं।
- गेम में सब कुछ एक साथ आता है। धीमे गेम तेज़ गेम से ज़्यादा सिखाते हैं।
- गेम को दोबारा देखना, चाहे पाँच मिनट के लिए ही सही, बच्चे को दिखाता है कि किस पल बात बिगड़ी, ताकि वही गलती कम बार हो।
हर दिन की शुरुआत एक पज़ल से करें
छोटे खिलाड़ियों के लिए पज़ल सबसे अच्छी आदत है। रोज़ की पाँच पज़ल वीकेंड के एक लंबे सेशन से ज़्यादा फ़ायदा करती हैं। यह वाली आज़माइए: सफ़ेद की चाल। क्या आप काले का हाथी जीत सकते हैं?
घोड़ा c7 पर कूदता है। वह शह देता है और साथ ही हाथी पर हमला करता है, इसलिए काले को राजा हटाना पड़ता है और अगली चाल में सफ़ेद हाथी खा लेता है। इस ट्रिक को फ़ोर्क कहते हैं, और एक बार बच्चा इसे देख ले, तो वह हर गेम में इसे ढूँढेगा। हमारी वेबसाइट पर आज की फ़्री पज़ल है, और हमारे मुफ़्त में शतरंज सीखिए पेज पर और भी बहुत सारी पज़ल हैं।
एक आसान साप्ताहिक रूटीन
- सोमवार: 5 पज़ल, फिर एक धीमा गेम।
- मंगलवार: क्लास का दिन, या पिछली क्लास का कोई एक आइडिया दोहराइए।
- बुधवार: 5 पज़ल, फिर साथ बैठकर सोमवार वाला गेम दोबारा देखिए।
- गुरुवार: परिवार के किसी सदस्य या कंप्यूटर के साथ एक धीमा गेम।
- शुक्रवार: 5 पज़ल और एक छोटा, मज़ेदार गेम।
- वीकेंड: एक फ़ैमिली गेम या ऑनलाइन टूर्नामेंट, और एक दिन की छुट्टी।
गेम को दोबारा कैसे देखें (भले ही आप ख़ुद न खेलते हों)
गेम के बाद बच्चे से कहिए कि वह आपको वह पल दिखाए जब वह सबसे ज़्यादा ख़ुश था, और वह पल जब उसे चिंता हुई। पूछिए, "तुम यहाँ क्या करना चाहते थे? सामने वाला खिलाड़ी क्या धमकी दे रहा था?" आपको जवाब पता होने की ज़रूरत नहीं। बस पूछने से ही बच्चा गेम के बारे में फिर से सोचता है, और असली सीख वहीं होती है।
इसे मज़ेदार बनाए रखें
- फ़्रिज पर एक छोटा चार्ट लगाइए और प्रैक्टिस वाले हर दिन के लिए एक स्टार जोड़िए।
- सिर्फ़ जीत की नहीं, अच्छी चालों की भी ख़ुशी मनाइए।
- बच्चे को क्लास का कोई नया आइडिया आपको सिखाने दीजिए। सिखाना सीखने का बहुत असरदार तरीका है।
- छुट्टी के दिन भी रखिए। आराम किया हुआ बच्चा थके हुए बच्चे से ज़्यादा सीखता है।
अगर आपका बच्चा अपने आप सीख रहा है और आप चाहते हैं कि कोई कोच उसे गाइड करे, तो हमारी छोटी ऑनलाइन क्लास में ऐसी होमवर्क पज़ल मिलती हैं जो इस रूटीन में फ़िट बैठती हैं। आज़माने के लिए फ़्री डेमो क्लास बुक कीजिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
बच्चे को रोज़ कितनी पज़ल करनी चाहिए?
ज़्यादातर बच्चों के लिए तीन से दस काफ़ी हैं। बहुत सारी जल्दबाज़ी में करने से बेहतर है कुछ पज़ल ध्यान से हल करना।
क्या बच्चे को ऑनलाइन तेज़ गेम खेलने चाहिए?
मज़े के लिए कुछ ठीक हैं, पर धीमे गेम कहीं ज़्यादा सिखाते हैं। हर खिलाड़ी के लिए कम से कम 10 मिनट वाले गेम खेलने को कहिए।
मेरा बच्चा प्रैक्टिस नहीं करना चाहता। मैं क्या करूँ?
इसे छोटा और ज़्यादा खेल जैसा बनाइए: पाँच की जगह एक पज़ल, या आपके साथ एक गेम। जब प्रैक्टिस खेल जैसी लगती है, तो रुचि आमतौर पर लौट आती है।
क्या मदद करने के लिए मुझे शतरंज आना ज़रूरी है?
नहीं। सवाल पूछना, रूटीन बनाए रखना और मेहनत की तारीफ़ करना, ख़ुद चालें जानने से ज़्यादा बच्चे की मदद करता है।