बच्चे के लिए अच्छा शतरंज कोच वह है जो आसान तरीके से समझाए, धीरज रखे, एक साफ़ प्लान पर चले और बच्चे का मन बार-बार आने को करे। खेलने का स्तर मायने रखता है, पर शुरुआती बच्चों के लिए यह सबसे ज़रूरी चीज़ नहीं है। जो शानदार खिलाड़ी सात साल के बच्चे को घोड़े की चाल नहीं समझा सकता, वह उस बच्चे के लिए सही कोच नहीं है।
यहाँ जानिए किन बातों पर ध्यान दें, कौन-से सवाल पूछें, और कौन-से ख़तरे के संकेत बताते हैं कि आपको दूसरा कोच ढूँढना चाहिए।
1. वे बातें आसानी से समझा सकते हों
बच्चों को पढ़ाना अच्छा खेलने से अलग हुनर है। ट्रायल क्लास में देखिए कि कोच छोटे वाक्य, आसान शब्द और बोर्ड पर ढेर सारे उदाहरण इस्तेमाल करता है या नहीं। अच्छा कोच सिर्फ़ जवाब बताने के बजाय "कौन-सा मोहरा ख़तरे में है?" जैसे सवाल पूछता है। जब बच्चे ख़ुद आइडिया ढूँढते हैं, तो वे कहीं ज़्यादा सीखते हैं।
कोच आपके बच्चे को ऐसी कोई पज़ल देकर इंतज़ार कर सकता है, बजाय तुरंत जवाब दिखाने के। उसी इंतज़ार में असली सीख होती है। इस आइडिया को बैक रैंक मेट कहते हैं।
2. वे एक प्लान पर चलते हों, बेतरतीब लेसन पर नहीं
कोच से पूछिए: "अगले तीन महीनों में मेरा बच्चा क्या सीखेगा?" अच्छा जवाब साफ़ कदम बताता है, जैसे पहले सारे मोहरों की चाल, फिर आसान चेकमेट, फिर आसान टैक्टिक्स। अगर जवाब गोलमोल है, तो हो सकता है बच्चा वही बातें दोहराता रहे या ऐसे टॉपिक पर पहुँच जाए जो उसके लिए बहुत मुश्किल हों।
3. वे धीरज रखते हों और हौसला बढ़ाते हों
सीखते समय बच्चे बहुत सारे गेम हारते हैं। अच्छा कोच हर गलती को सीखने का मौका मानता है, शर्मिंदा होने की बात कभी नहीं। देखिए कि जब बच्चा गलत चाल चलता है तो कोच कैसे पेश आता है। प्यार से सुधारना और अच्छी सोच की तारीफ़ करना बच्चे का मन सालों तक लगाए रखता है।
4. वे होमवर्क दें और प्रोग्रेस बताएँ
सुधार क्लास के बीच के समय में भी होता है। अच्छा कोच थोड़ा होमवर्क देता है, जैसे कुछ पज़ल, और अगली बार उसे जाँचता है। वह आपको, यानी माता-पिता को, यह भी बताता है कि बच्चे ने क्या सीखा और क्या प्रैक्टिस करनी है। अगर आपको प्रोग्रेस के बारे में कभी कुछ सुनने को नहीं मिलता, तो ख़ुद पूछिए।
5. वे बच्चों को सुरक्षित रखें
यह बात शतरंज के हुनर जितनी ही ज़रूरी है। कोई कोच या अकैडमी चुनने से पहले ये बातें जाँच लीजिए:
- अकैडमी ने कोच की पहचान और बैकग्राउंड की जाँच की है।
- क्लास ग्रुप में होती हैं, या ऐसे होती हैं कि माता-पिता देख सकें या जुड़ सकें, प्राइवेट चैट में नहीं।
- माता-पिता के पास कोई चिंता उठाने का साफ़ तरीका है।
- अकैडमी के पास लिखे हुए नियम हैं कि कोच बच्चों के साथ कैसा व्यवहार करें।
ट्रायल क्लास में पूछने लायक सवाल
- हर बैच में कितने बच्चे हैं, और क्या वे एक ही स्तर के हैं?
- पहले तीन महीनों में मेरा बच्चा क्या सीखेगा?
- मुझे कैसे पता चलेगा कि मेरा बच्चा सुधर रहा है?
- क्या होमवर्क मिलता है, और उसे कौन जाँचता है?
- क्या क्लास मेरे बच्चे की भाषा में हो सकती है?
- अगर मेरे बच्चे की कोई क्लास छूट जाए तो क्या होता है?
ख़तरे के संकेत
सावधान रहिए अगर कोई कोच "तीन महीने में 1500 रेटिंग" जैसे जल्दी नतीजों का वादा करे, बच्चे के तैयार होने से पहले उसे टूर्नामेंट में धकेले, या अपने पढ़ाने का प्लान न समझा पाए। तब भी सावधान रहिए अगर हर क्लास के बाद बच्चा ऊबा हुआ या डरा हुआ लगे। सही कोच के साथ बच्चा शतरंज का बेसब्री से इंतज़ार करता है।
Daizen Chess Champs में आप पढ़ सकते हैं कि हम अपने कोच कैसे चुनते और जाँचते हैं, और फ़ैसला करने से पहले फ़्री डेमो क्लास में किसी कोच से मिल सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या शुरुआती बच्चों को सिखाने के लिए शतरंज कोच की रेटिंग ऊँची होनी चाहिए?
नहीं। शुरुआती बच्चों के लिए आसान तरीके से समझाने और बच्चों का मन लगाए रखने की क्षमता, बहुत ऊँची रेटिंग से ज़्यादा मायने रखती है। जैसे-जैसे बच्चा आगे बढ़ता है, अच्छी रेटिंग ज़्यादा ज़रूरी होती जाती है।
क्या प्राइवेट कोच ग्रुप क्लास से बेहतर है?
हमेशा नहीं। ग्रुप क्लास मज़ेदार होती हैं, उनमें मन लगा रहता है, और बच्चे एक-दूसरे से सीखते हैं। प्राइवेट कोचिंग तब काम आती है जब बच्चे को ज़्यादा ध्यान की ज़रूरत हो या वह टूर्नामेंट की गंभीरता से तैयारी कर रहा हो।
सुधार दिखने में कितना समय लगता है?
हफ़्ते में एक या दो क्लास और थोड़ी प्रैक्टिस के साथ, ज़्यादातर शुरुआती बच्चे दो से तीन महीनों में आत्मविश्वास से पूरे गेम खेलने लगते हैं।
क्या मुझे बच्चे की क्लास में साथ बैठना चाहिए?
छोटे बच्चों के लिए पहली एक-दो क्लास में साथ बैठना अच्छा रहता है। उसके बाद एक अच्छा कोच और प्रोग्रेस अपडेट आपको भरोसा दिला देने चाहिए।